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वेताल पच्चीसी - सातवीं कहानी / Vikram Betal stories in hindi

वेताल पच्चीसी की सातवीं कहानी / Vikram Betal stories in hindi    Vikram Betal         मिथलावती नामक नगरी में गुणधिप नाम का राजा राज्य करता था।  उसकी सेवा करने के लिए दूर देश से एक राजकुमार आया । बहुत कोशिशें करने के बाद भी उसकी मुलाकात राजा से न हुई । जो कुछ वह अपने साथ लाया था , सब बराबर हो गया । एक दिन राजा शिकार खेलने गया । राजकुमार भी साथ हो लिया । चलते-चलते राजा एक वन मे पहुंचा । वहां उसके नौकर-चाकर बिछड़ गए।  राजा के साथ अकेला वह राजकुमार रहा।  उसने राजा को रोका।  राजा ने उसकी ओर देखकर पूछा - तू इतना कमजोर कैसे हो रहा है ? उसने कहा - इसमें मेरे कर्म का दोष है । मैं जिस राजा के पास रहता हूँ वह हजारों को पालता है लेकिन उसकी नज़र मुझपर नहीं पड़ती । राजन् छः बातें आदमी को हल्का करती हैं - खोटे नर की प्रीति , बिना कारण हंसी , स्त्री से विवाद , असज्जन स्वामी की सेवा , गधे की सवारी और बिना संस्कृत की भाषा।  और हे राजा पांच चीजें आदमी के पैदा होते ही विधाता उसके भाग्य में लिख देता है - आयु , कर्म , धन , विद्या और यश ।  राजन् जब त...

वेताल पच्चीसी - छठी कहानी / Vikram Betal stories in hindi

वेताल पच्चीसी - छठी कहानी / Vikram Betal stories in hindi Vikram Betal stories in hindi धर्मपुर नाम की एक नगरी थी । उसमें धर्मंशील नाम का राजा राज्य करता था । उसके अन्धक नाम का एक दीवान था ।  एक दिन दीवान ने कहा - महाराज , एक मंदिर बनवाकर देवी को बैठाकर पुजा की जाए तो बड़ा पुण्य मिलेगा । राजा ने ऐसा ही किया । एक दिन देवी ने उससे प्रसन्न होकर वर मांगने के लिए कहा।  राजा को कोई संतान न थी इसलिए उसने देवी से पुत्र की कामना की ।  देवी बोली - अच्छा है।  तुझे बड़े ही प्रतापी पुत्र की प्राप्ति होगी।  कुछ समय पश्चात राजा के घर एक लड़के का जन्म हुआ। सारे नगर में बड़ी खुशी मनाई गई । एक दिन एक धोबी अपने मित्र के साथ उस नगर में आया । उसकी निगाह देवी के मंदिर पर पड़ी । उसने देवी को प्रणाम करने का इरादा किया । उसी समय उसे एक धोबी की लड़की दिखाई पड़ी जो बहुत ही सुन्दर थी।  उसे देखकर वह इतना पागल हो गया कि देवी के मंदिर जाकर देवी से प्रार्थना कि - हे देवी ! यह लड़की मुझे मिल जाए । अगर यह मुझे मिल गई तो मैं तुझे अपना सिर चढ़ा दूंगा।  इसके बाद वह हर घड़ी बैचैन रहने लगा ...

वेताल पच्चीसी - पांचवी कहानी / Vikram Betal stories in hindi

वेताल पच्चीसी - पांचवी कहानी / Vikram Betal stories in hindi Vikram Betal  उज्जैन में महाबल नामक राजा राज्य करता था । उसको हरिदास नामक एक दूत था जिसकी महादेवी नामक कन्या बड़ी रूपवती और गुणवती थी । जब वह विवाह योग्य हुई तो हरिदास को उसकी बड़ी चिंता हुई । इसी बीच राजा ने उसे एक दूसरे राजा के पास भेजा । कई दिन चलकर हरिदास वहां पहुंचा । राजा ने उसे बड़ी अच्छी तरह से रखा।  एक दिन उसके पास एक ब्राह्मण आया ।  वह बोला - तुम मुझे अपनी लड़की दे दो । हरिदास ने कहा - मैं उसे अपनी लड़की दूंगा जिसमें सारे गुण हो । ब्राह्मण ने कहा - मेरे पास एक ऐसा रथ हैं , जिस पर बैठकर जहां चाहें घड़ी भर में पहुंच जाओगे । हरिदास ने कहा - ठीक है , कल सवेरे उसे ले आना । अगले दिन दोनों रथ पर बैठ उज्जैन आ पहुंचे । दैवयोग से हरिदास का लड़का अपनी बहन को किसी दूसरे तथा हरिदास की स्त्री किसी तीसरे को अपनी लड़की देने का वादा कर चुके थे । इस तरह तीन वर इकट्ठे हो गए । हरिदास सोचने लगा , कन्या एक हैं और वर तीन । अब क्या करे ? इसी बीच एक राक्षस आया और कन्या को उठाकर विंध्याचल पर्वत ले गया । तीनों वरो में से एक ज्ञा...

वेताल पच्चीसी - चौथी कहानी / Vikram Betal stories in hindi

वेताल पच्चीसी - चौथी कहानी / Vikram Betal stories in hindi     Vikram Betal stories in hindi भोगवती नाम की एक नगरी थी । उसमें रूपसेन राजा राज्य करता था । उसके पास चिंतामणि नाम का एक तोता था।   एक दिन राजा ने उससे पूछा - हमारा ब्याह किसके साथ होगा ? तोते ने कहा - मगध देश की राजकुमारी चन्द्रावती के साथ होगा।   राजा ने ज्योतिषीयों को बुलाकर पूछा तो उन्होंने भी वही कहा। उधर मगध देश की राजकुमारी के पास एक मैना थी । उसका नाम था मदन मञ्जरी । एक दिन राजकुमारी ने उससे पूछा कि मेरा विवाह किसके साथ होगा तो उसने कह दिया कि भोगवती नगर के राजा रूपसेन के साथ । इसके बाद दोनों का विवाह हो गया। रानी के साथ उसकी मैना भी आ गई । राजा-रानी ने तोता-मैना का विवाह करके एक पिंजड़े में बंद कर दिया ।  एक दिन की बात है , तोता-मैना में बहस हो गई।   मैना ने कहा - आदमी बड़ा पापी , दगाबाज और अधर्मी होता है।   तोते ने कहा - स्त्री झूठी, लालची और हत्यारी होती है । दोनों का झगड़ा ज्यादा बढ़ गया तो राजा ने कहा - क्या बात है , तुम आपस में क्यों लड़ रहे हो ? मैना ने...

वेताल पच्चीसी तीसरी कहानी / Vikram Betal stories in hindi

वेताल पच्चीसी - तीसरी कहानी / Vikram Betal stories in hindi       Vikram Betal stories in hindi वर्धमान नगर में रूपसेन नामक राजा राज्य करता था । एक दिन उसके दरबार में वीरवर नामक राजपूत नौकरी के लिए आया। राजा ने पूछा कि तुम्हें ख़र्च के लिए क्या चाहिए तो उसने कहा कि "हजार तोले सोना" । सुनकर सबको बड़ा आश्चर्य हुआ ।  राजा ने पूछा - तुम्हारे घर में कौन-कौन हैं ? वीरवर बोला - मेरी स्त्री , बेटा और बेटी । राजा को और भी अचम्भा हुआ कि चार लोग इतने धन का क्या करेंगे । फिर भी राजा ने उसे अपनी सेवा में रख लिया । उस दिन से वीरवर रोज भंडारी से एक तोले सोना लेकर घर आता था । उसमें से आधा ब्राह्मणों में बाँट देता, बाकी के दो हिस्से करके एक मेहमानों , वैराग्यियों और संन्यासीयो को दे देता और दूसरे से भोजन बनवाकर पहले गरीबों को खिलाता , उसके बाद जो कुछ भी बचता , उसे अपने स्त्री-बच्चों को खिलाता और आप खाता । काम था राजा के प्रमुख अंगरक्षक का । शाम होते ही ढाल-तलवार लेकर राजा के पंलग की चौकीदारी करता । राजा को जब भी उसकी जरूरत होती वह हाज़िर होता । एक रात करीब आधी रात का समय था , रा...

वेताल पच्चीसी दूसरी कहानी / second story of Vikram Betal

    वेताल पच्चीसी की कहानियाँ - दूसरी कहानी / Vikram Betal stories in hindi               Stories of Vikram Betal यमुना के किनारे धर्मस्थान नामक एक नगर था । उस नगर में गणाधिप नाम का राजा राज्य करता था । उसी नगर में केशव नामक एक ब्राह्मण भी रहता था । ब्राह्मण यमुना के तट पर जप-तप किया करता था । उसकी एक लडक़ी थी जिसका नाम मालती था । वह बहुत ही रूपवती थी । जब वह शादी के लायक हुई तो उसके माता-पिता और भाई को उसकी चिंता हुई । संयोग से एक दिन जब ब्राह्मण अपने यजमान की बारात में गया और भाई पढ़ने गया तभी उसके घर एक ब्राह्मण लड़का आया।  लड़की की मां ने उसके रूप और गुणों को देखकर उससे कहा कि मैं अपनी लड़की का ब्याह तुमसे करूंगी । दूसरी ओर उसके पिता को भी एक लड़का मिल गया और उसने भी लडके को वही वचन दे दिया । उधर जब लड़की का भाई पढने गया तो उसे भी एक लड़का मिल गया और उसने भी वही वचन दे डाला । कुछ समय बाद जब बाप और बेटे एक जगह इकट्ठे हुए तो देखते हैं कि वहां एक तीसरा लड़का भी मौजूद है । दो तो उनके साथ आए थे । अब क्या हो ? ब्राह्मण , ब्राह्मणी और ...

वेताल पच्चीसी की पहली कहानी / Vikram Betal stories in hindi

   वेताल पच्चीसी की पहली कहानी / Vikram Betal stories in hindi         Vikram Betal stories in hindi काशी में प्रतापमुकुट नामक राजा राज्य करता था।  उसके वज्रमुकुट नाम का एक पुत्र था । एक दिन राजकुमार दीवान के लड़के के साथ जंगल में शिकार खेलने के लिए गया । घूमते-घूमते उन्हें एक तालाब दिखा ।  उसके पानी में कमल खिले थे और हंस किलोल कर रहे थे । किनारों पर घने पेड़ थे , जिनपर पक्षी चहचहा रहे थे । दोनों मित्र वहां रूक गए और तालाब के पानी में हाथ मुंह धोकर महादेव के मंदिर गए । घोड़ो को उन्होंने मंदिर के बाहर बांध दिया । वो मंदिर में दर्शन करके बाहर आए तो देखते क्या है कि एक राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ तालाब में स्नान करने आई थी । दीवान का लड़का तो वही एक पेड़ के नीचे बैठा रहा , पर राजकुमार से न रहा गया । वह आगे बढ़ गया । राजकुमारी ने उसकी तरफ देखा तो वह उसपर मोहित हो गया । राजकुमारी भी उसकी तरफ देखती रही । फिर उस राजकुमारी ने अपने जुड़े में से कमल का फूल निकाला , उसे अपने कान से लगाया , दांत से कुतरा , पैर के नीचे दबाया और फिर छाती से लगा , अपनी सहेलि...

वेताल पच्चीसी - विक्रम वेताल की कहानियाँ / Vikram Betal stories in hindi

वेताल पच्चीसी - विक्रम वेताल की कहानियाँ / Vikram Betal stories in hindi एक दिन की बात है , राजा विक्रमादित्य के दरबार में शान्तिशील नाम का एक योगी आया और राजा को एक फल देकर चला गया । वह रोज दरबार आता और राजा को एक फल देता था । राजा वह फल खाते नहीं भण्डारी को दे देते । एक दिन राजा विक्रमादित्य अपना अस्तबल देखने गए तभी वह योगी आया और उसने राजा के हाथ में फल दे दिया । विक्रमादित्य ने वह फल उछाला तो वह हाथ से छूटकर धरती पर गिर गया । उसी समय एक बंदर ने झपटकर उसे उठा लिया और तोड़ डाला । उसमें से एक लाल निकला जिसे देखकर सबकी आँखे चौंधिया गई । राजा को बड़ा अचरज हुआ ।  राजा विक्रमादित्य ने योगी से पूछा आप यह लाल मुझे क्यों दे रहे हैं ?  योगी ने जवाब दिया - महाराज! राजा , गुरु , ज्योतिष , वैद्य और बेटी इनके घर कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए । राजा विक्रमादित्य ने भण्डारी को बुलाकर पीछे के सभी फलों को मंगवाया तुड़वाने पर सभी में से एक एक लाल निकला । इतनें लाल देखकर राजा खुश हो गए ।  उन्होंने जौहरी को बुलाकर उनका मूल्य पूछा ।  जौहरी ने बताया - महाराज! यह लाल इतने कीमती है कि इनका...

भूतिया कुएं की कहानी - Horror well story in hindi

  भूतिया कुएं की कहानी । Horror well story in hindi          Horror well story in hindi क्रिस्टी Krishti नाम की एक प्यारी बच्ची अपनी मम्मी रेचल के साथ रहती थी । क्रिस्टी के पापा नहीं थे इसलिए उसकी मम्मी रेचल ही नौकरी करके क्रिस्टी का पालन-पोषण करती थी । रेचल काम से वापस लौटकर क्रिस्टी को स्कूल से लाती और दोनों घर में साथ में खाना खाते, खेलते , टीवी देखते और बहुत सारी बातें करते थे । दोनों माँ बेटी अपनी जींदगी में बहुत खुश थे । एक बार रेचल क्रिस्टी को स्कूल से लाने गई तो उसकी टीचर ने क्रिस्टी की एक बनाई तस्वीर दिखाई जिसमे वह रेचल और एक बच्ची थी । जो उसका हाथ पकड़ खींच रही थी।   रेचल क्रिस्टी को लेकर घर आ गई। दोनों रात को जब साथ खाना खाने बैठे तो रेचल ने क्रिस्टी से पूछा कि तुमने बताया नहीं कि तुम्हें एक नई दोस्त मिल गई है । क्रिस्टी बोली आपने पूछा ही नहीं तब रेचल ने पूछा कि तुम्हारी नई दोस्त कहां रहती हैं तो क्रिस्टी ने बताया कि वह एक अंधेरे कुएं में रहती हैं । रेचल को क्रिस्टी की बात कुछ अजीब लगी तब उसने कहा कि मैं जब तक किचन का काम खत्म करती...

अघोरी साधुओं की रहस्यमयी दुनिया । Aghori sadhuo ki Rahasmayi Dunia

   अघोरी साधुओं की रहस्यमयी दुनिया । Aghori sadhuo ki Rahasmayi dunia भगवान भोलेनाथ Bhagwan Bholenath को तंत्र शास्त्र का देवता माना जाता है । अघोरी मुख्य रूप से भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं । उन्हें अघोरवाद का जन्मदाता माना जाता है ।        Aghori sadhu image     आधी रात के बाद का समय जब हम नींद की आगोश में रहते हैं उस समय घोर अंधकार में अघोरी-तांत्रिक Aghori Tantrik शमशान में तंत्र क्रियाएं करते हैं । इस समय वे घोर साघना करते हैं । अघोरी का नाम सुनते ही मन में डर उत्पन्न हो जाता है यह उनकी वेशभूषा और रहनसहन के वजह से होता है । अघोर विद्या नहीं बल्कि इसका स्वरूप भयानक है । मूलतः अघोरी उसे कहते है जिसके भीतर अच्छे-बुरे , सुगंध-दुर्गंध , प्रेम-नफ़रत , ईर्ष्या-मोह जैसे भाव मिट जाए । जो किसी में फ़र्क न करें । जो शमशान जैसे घृणित और डरावनी जगह में भी उसी सहजता से रह ले जैसे लोग घरों में रहते हैं । अघोरी लाशों के साथ सहवास भी करता है और मानव मांस का भी भक्षण करते हैं । ऐसा करने का यह तर्क है कि उस व्यक्ति के मन से घृणा निकल जाए ।  अघोरी साधु...

अकबर बीरबल के किस्से - मूर्खों की फेरहिस्त

            AKBAR AND BIRBAL STORIES IN HINDI शहंशाह अकबर घुड़सवारी के इतने शौकीन थे कि पसंद आने पर घोड़ो का मुंहमांगा दाम देने के लिए तैयार रहते थे। दूर दराज के मुल्कों, जैसे अरब , पर्शिया आदि से घोड़ो के विक्रेता मजबूत और आकर्षक घोड़े अकबर के दरबार में लाया करते थे । शहंशाह अपने व्यक्तित्व उपयोग के लिए गए घोड़े की अच्छी कीमत दिया करते थे। जो घोड़े शहंशाह की रूचि के नहीं होते उन्हें सेना के लिए खरीद लिया जाता था ।  एक दिन घोड़ो का एक नया विक्रेता अकबर के दरबार में आया । अन्य व्यापारी भी उसे नहीं जानते थे । उसने दो बेहद आकर्षक घोड़े शहंशाह को बेचे और शहंशाह अकबर से कहा कि वह ऐसे सौ घोड़े लाकर दे सकता है बशर्ते कि उसे आधी रकम पेशगी के रूप में पहले ही दे दी जाए ।  अकबर को घोड़े बहुत पसंद आए थे इसलिए उन्होंने वैसे ही सौ घोड़े लेने का तुरंत मन बना लिया।  शहंशाह अकबर ने अपने खजांची को बुलाकर उसे व्यापारी को पेशगी देने का आदेश दिया । खजांची उस व्यापारी को लेकर खजाने की ओर चल दिया।  दरबार में किसी को भी शहंशाह अकबर की यह बात अच्छी नहीं लगी कि श...

अकबर बीरबल की 20+ किस्से कहानियां

मुगल सम्राट अकबर एक बार जंगल में रास्ता भटक जाते हैं तब महेश दास नाम का एक लड़का उन्हें राह दिखाता है । शहंशाह अकबर उस लड़के की निडरता और बुद्धिमानी से बहुत खुश होते हैं और उसे अपने दरबार आने का न्योता देते है । समय के साथ यह लड़का महेश दास बीरबल के नाम से प्रसिद्ध होते हैं और अकबर के नवरत्नों में से एक होते है । बीरबल अकबर की किसी भी समस्या या सवाल को चुटकियों में हल कर देते है इसलिए वे शहंशाह अकबर के सबसे प्रिय होते हैं।  अकबर बीरबल के किस्से बच्चे से बड़ो सब को बहुत पसंद आता है । यहां आपको अकबर बीरबल के 20+ किस्से कहानियां पढने को मिलेंगे ।  20+ Akbar Birbal stories in hindi :- AKBAR AND BIRBAL STORIES IN HINDI ■  अकबर बीरबल की पहली मुलाकात / Akbar Birbal ki kahaniya ■  अकबर बीरबल के 3 किस्से कहानियां / Akbar Birbal stories in hindi ■   अकबर बीरबल के 5 मजेदार किस्से    ■  तीन तीन गधों का बोझ / Akbar Birbal stories in hindi ■  किसका पानी अच्छा / Akbar Birbal stories in hindi ■  यह हुजूर का दिया हैं / Akbar Birbal stories in hindi ...

अकबर बीरबल की पहली मुलाकात / अकबर बीरबल की कहानियाँ

               Stories of Akbar Birbal in hindi / pehli Mulakat शहंशाह अकबर को शिकार का बहुत शौक था । वे कभी भी शिकार के लिए निकल जाया करते थे । एक बार शहंशाह शिकार पर निकले । वे घोड़ा इतनी तेजी से चला रहे थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कुछ सैनिकों को छोड़कर उनकी बाकी सेना बहुत पीछे छूट गई है।  शाम हो गई थी सभी भूख प्यास से व्याकुल थे और समझ चुके थे कि वे रास्ता भटक चुके हैं । अकबर को समझ नहीं आ रहा था कि किस ओर जाएँ । कुछ दुर जाने पर उन्हें एक तिराहा नजर आया । शहंशाह अकबर बहुत खुश हुई कि चलो अब किसी रास्ते से अपनी राजधानी तो पहुंच ही जाऐंगे । अकबर उलझन में था कि जाएं तो जाएं किस ओर ? वे सब सोच रहे थे पर कुछ समझ न आएं । तभी उन्होंने देखा कि एक लड़का किनारे खड़ा उन्हें घूर रहा है । सैनिकों ने उसे पकड़कर अकबर के सामने पेश किया ।  अकबर ने कड़कती आवाज़ में पूछा - ऐ लड़के , कौन सी सड़क आगरा को जाती है ? लड़का मुस्कुराते हुए बोला- जनाब यह सड़क चल नहीं सकतीं तो आगरा कैसे जाएगी । महाराज जाना तो आपकों ही पडेगा और इतना कहकर वह लड़का खिलखिला कर हं...

अकबर बीरबल के 3 किस्से कहानियां / Akbar Birbal stories in hindi

            3 Akbar Birbal stories in hindi         #1 सबसे बड़ा हथियार / अकबर बीरबल के किस्से कहानियां / 3 Akbar Birbal stories in hindi  शहंशाह अकबर और बीरबल के बीच कभी कभी ऐसी बातें भी हुआ करतीं थी कि जिनकी परख करने में जान का खतरा भी था । एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा - बीरबल बताओं संसार में सबसे बड़ा हथियार कौन-सा हैं ? बीरबल बोले - आत्मविश्वास । अकबर ने बीरबल का जवाब सुनकर अपने मन में रख लिया और किसी समय इसकी परख करने का निश्चय किया। संयोगवश एक दिन एक हाथी पागल हो गया। ऐसे में हाथी को जंजीरों में जकड़ कर रखा जाता है।   अकबर ने बीरबल के आत्मविश्वास की परख करने के लिए उन्हें बुलावा भेजा और इधर महावत को यह बात समझाई कि जैसे ही बीरबल आए वैसे ही हाथी की जंजीर खोल दी जाए । बीरबल को इस बात का पता नहीं था । वे शहंशाह अकबर से मिलने के लिए दरबार की ओर जा रहे थे तभी पागल हाथी को उनकी तरफ छोड़ दिया गया।  बीरबल अपनी ही मस्ती में चलें जा रहे थे कि उनकी नजर पागल हाथी पर पड़ी जो चिंघाडता हुआ उनकी तरफ ही आ रहा था। बीरबल तो थे ही ...

अकबर बीरबल के 5 मजेदार किस्से / Akbar Birbal stories

  Stories of Akbar Birbal in hindi #1 मासूम सजा / अकबर बीरबल की कहानियाँ / Akbar Birbal stories in hindi एक दिन शहंशाह अकबर ने दरबार में आते ही दरबारियों से पूछा - किसी ने आज मेरी मूछें नोचने की ज़ुर्रत की , उसे क्या सजा दी जानी चाहिए ? दरबारियों में से किसी एक ने कहा उसे सूली पर चढ़ा देना चाहिए , किसी ने कहा उसे फांसी की सजा सुनाई जाए , किसी ने कहा उसका गर्दन धड़ से अलग कर देना चाहिए ।  शहंशाह अकबर उन सबकी बातें सुन गुस्से में लाल हो गए और तब उन्होंने बीरबल से पूछा - बीरबल तुम्हारी क्या राय है ? बीरबल ने कहा - गुस्ताखी माफ़ हुजूर ! लेकिन इस गुनाहगार को सजा के बजाय उपहार देना चाहिए । शहंशाह हल्के से मुस्कुराएं और बोले "क्या मतलब?" "हुजूर ! जो व्यक्ति आपकी मूछें नोचने की ज़ुर्रत कर सकता है वह आपके शहजादे के सिवा और कोई नहीं हो सकता है । उस मासूम गुनाहगार को मिठाई खाने की मासूम सजा दी जानी चाहिए । " बीरबल ने कहा । शहंशाह अकबर ने जोर का ठहाका लगाया और दरबारी बगले झांकने लगे।   # 2 सब बह जाएंगे / अकबर बीरबल की कहानियाँ / Akbar Birbal stories in hindi    एक बार ...

तीन तीन गधों का बोझ/ अकबर बीरबल की कहानियाँ

              Stories of Akbar Birbal in hindi शहंशाह अकबर और उनके दो पुत्रों को नदी में नहाने का शौक था।  बीरबल भी उनके साथ जाया करते थे लेकिन वे कभी नदी में नहाते नहीं थे । एक दिन शहंशाह अकबर और उनके दो पुत्र नदी नहाने गए साथ में बीरबल भी थे । बीरबल नदी के किनारे जाकर बैठ गए और शहंशाह और उनके पुत्रों के वस्त्रों की रखवाली करने लगे । बीरबल ने उनके वस्त्रों को अपने कंधे पर टांग लिया।  शहंशाह की आदत थी वे बीरबल को हमेशा छेड़ता रहता था।  शहंशाह ने कहा बीरबल लगता है कि तुम्हारे कंधे पर एक गधे का बोझ है ।  बीरबल यह सुनकर कहां चुप रहने वाले थे उन्होंने कहा - हुजूर ! एक नहीं दो नहीं तीन गधों का बोझ । शहंशाह यह सुनकर चुप हो गए क्योंकि बीरबल ने तीनों के कपड़े टांग रखे थे । 

किसका पानी अच्छा / अकबर बीरबल की कहानियाँ

        Stories of Akbar Birbal in hindi  एक बार शहंशाह अकबर ने भरे दरबार में पूछा कि किस नदी का पानी सबसे अच्छा है।  सभी दरबारियों ने एकमत होकर कहां कि गंगा नदी का पानी सबसे अच्छा है । लेकिन बीरबल चुपचाप बैठे सब सुन रहे थे।  शहंशाह अकबर ने बीरबल को चुप देखकर पूछा - बीरबल तुम चुप क्यों हो , तुम्हारे हिसाब से किस नदी का पानी सबसे अच्छा है ? बीरबल बोले - हुजूर! पानी सबसे अच्छा यमुना नदी का होता है । बीरबल की बात सुनकर शहंशाह अकबर को बड़ी हैरानी हुई । उन्होंने बीरबल से कहा - यह तुम किस आधार पर कह रहे हो जबकि हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार तो गंगा के पानी को सबसे पवित्र और शुद्ध माना गया है ।  बीरबल ने कहा - हुजूर ! मैं भला पानी की तुलना अमृत से कैसे कर सकता हूँ ? गंगा नदी में बहने वाला पानी , पानी नहीं बल्कि अमृत है । इसलिए मैंने कहा कि यमुना नदी का पानी सबसे अच्छा है । शहंशाह अकबर और बाकी सारे दरबारी बीरबल का जवाब सुनकर निरूत्तर हो गए ।

यह हुजूर का दिया हैं / अकबर बीरबल की कहानियाँ

          Stories of Akbar Birbal in hindi  सर्दियां खत्म हो रही थी और सूर्य की किरणों की गर्मी बढ़ रही थी । ऐसे में माहौल बड़ा सुखमय प्रतित हो रहा था।  मौसम का लुत्फ़ उठाने के लिए शहंशाह अकबर और बीरबल अपने अपने घोड़ो पर सवार होकर सैर के लिए निकले थे । कुदरत के अद्भुत नजारों का आनंद शहंशाह अकबर ले रहे थे।   अचानक से चारों ओर की सुंदरता को देखकर अकबर के मुंह से निकला - "भाई अस्क पेदार शूमस्त  " । इन शब्दों के दो अर्थ थे - पहला अर्थ फारसी में था - यह घोड़ा तुम्हारे बाप का है और दूसरा अर्थ यह घोड़ा तुम्हारा बाप है । बीरबल तुरंत समझ गए कि शहंशाह क्या कहना चाहते हैं । वे बोले - "दाद-ए-हुजुरस्त" ।  इसका अर्थ होता है यह हुजूर का दिया हैं । यह सुनकर शहंशाह अकबर को कुछ बोलते न बना । जैसे को तैसा जवाब मिला।  

चोर की दाढ़ी में तिनका / अकबर बीरबल की कहानियाँ

               Stories of Akbar Birbal in hindi शहंशाह अकबर अक्सर बीरबल से अटपटे सवाल पूछते थे लेकिन एक बार उन्होंने बीरबल को छकाने की सोची । उन्होंने अपनी बेशकीमती अंगूठी छिपाकर एक सरदार को दे दी और उससे बात छुपाकर रखने के लिए कहा ।  जब बीरबल शहंशाह के पास गए तो उन्होंने कहा - "आज हमारी अंगूठी खो गई।  सुबह तक तो हमारे ही पास थी लेकिन शौच जाते वक्त मैंने  उतार कर रख दी और जब वापस लौटा तो देखा कि अंगूठी तो वहां है ही नहीं " बीरबल चुपचाप सुन रहे थे।  शहंशाह अकबर ने फिर कहा - मुझे लगता है यह काम महल के ही किसी व्यक्ति का है । बाहरी आदमी ऐसी हिम्मत नहीं कर सकता है । बीरबल तुम तो ज्योतिषिशास्त्र के भी ज्ञाता हो इसलिए पता करके बताओं कि मेरी अंगूठी किसने ली ।  बीरबल ने उस जगह का पता पूछा जहां उन्होंने शौच से पूर्व अंगूठी रखी थी । शहंशाह अकबर ने एक अलमारी की ओर इशारा किया ।  बीरबल ने उस अलमारी के पास जाकर उससे कान लगाकर कुछ देर बाद हटा लेने का नाटक किया । देखने वालों को लगा कि वे कुछ सुनने का प्रयास कर रहे हैं । कुछ देर बाद ब...

ऊंट की गर्दन / अकबर बीरबल की कहानियाँ

            Stories of Akbar Birbal in hindi             शहंशाह अकबर बीरबल की हाजिरजवाबी के बड़े कायल थे।  एक बार शहंशाह ने दरबार में बीरबल से खुश होकर उन्हें इनाम देने की घोषणा की। कई दिन बीत गया लेकिन बीरबल को उनका इनाम नहीं मिला । बीरबल सोच रहे थे कि शहंशाह को कैसे याद दिलाया जाए ? एक शाम शहंशाह अकबर और बीरबल सैर के लिए यमुना नदी के किनारे गए । अकबर ने वहां एक ऊंट को घूमते हुए देखा । अकबर ने बीरबल से पूछा - बताओं बीरबल ऊंट की गर्दन मुडी क्यों रहतीं हैं ?  बीरबल ने सोचा कि शहंशाह को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है । उन्होंने कहा - 'हुजूर ! यह ऊंट किसी से वादा करके भूल गया इसलिए इसकी गर्दन मुड़ गई । जहाँपनाह कहते हैं कि जो भी वादा करके भूल जाता है , भगवान उसकी गर्दन ऊंट की तरह मोड देते है । यह एक तरह की सजा हैं ।' तभी शहंशाह अकबर को याद आया कि वे भी बीरबल को इनाम देने का वादा भूल गए है । उन्होंने जल्दी से बीरबल को महल में चलने के लिए कहा और महल पहुंचते ही सबसे पहले बीरबल को इनाम दिया और कहा कि अब तो मेरी गर्दन ...