वेताल पच्चीसी - विक्रम वेताल की कहानियाँ / Vikram Betal stories in hindi एक दिन की बात है , राजा विक्रमादित्य के दरबार में शान्तिशील नाम का एक योगी आया और राजा को एक फल देकर चला गया । वह रोज दरबार आता और राजा को एक फल देता था । राजा वह फल खाते नहीं भण्डारी को दे देते । एक दिन राजा विक्रमादित्य अपना अस्तबल देखने गए तभी वह योगी आया और उसने राजा के हाथ में फल दे दिया । विक्रमादित्य ने वह फल उछाला तो वह हाथ से छूटकर धरती पर गिर गया । उसी समय एक बंदर ने झपटकर उसे उठा लिया और तोड़ डाला । उसमें से एक लाल निकला जिसे देखकर सबकी आँखे चौंधिया गई । राजा को बड़ा अचरज हुआ । राजा विक्रमादित्य ने योगी से पूछा आप यह लाल मुझे क्यों दे रहे हैं ? योगी ने जवाब दिया - महाराज! राजा , गुरु , ज्योतिष , वैद्य और बेटी इनके घर कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए । राजा विक्रमादित्य ने भण्डारी को बुलाकर पीछे के सभी फलों को मंगवाया तुड़वाने पर सभी में से एक एक लाल निकला । इतनें लाल देखकर राजा खुश हो गए । उन्होंने जौहरी को बुलाकर उनका मूल्य पूछा । जौहरी ने बताया - महाराज! यह लाल इतने कीमती है कि इनका...
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